A 25-year-old woman gave birth to a baby girl on a rescue boat of NDRF in flood-hit East Champaran district | मोतिहारी में रेस्क्यू बोट में महिला ने बच्ची को जन्म दिया; पूर्वी चंपारण में 37 लोगों ने पेड़ के सहारे नाव को डूबने से बचाए रखा

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मोतिहारी4 मिनट पहले

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महिला और बच्चे को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया जहां डॉक्टरों का कहना है कि दोनों स्वस्थ हैं।

  • मोतिहारी में गर्भवती और आशा वर्कर को एनडीआरएफ ने रेस्क्यू किया, महिला ने बोट में ही बच्चे को जन्म दिया
  • पूर्वी चंपारण में नाव का इंजन खराब हो गया था, दो घंटे की मशक्कत के बाद एनडीआरएफ ने लोगों को सुरक्षित पहुंचाया

बिहार बाढ़ संकट से जूझ रहा है। एनडीआरएफ और वायुसेना की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। इस बीच रविवार को कुछ सुख देने वाले पल भी सामने आए। मोतिहारी जिले में गंडक नदी में एनडीआरएफ की बोट में महिला ने एक बच्ची को जन्म दिया है। वहीं, पूर्वी चंपारण जिले में एनडीआरएफ की एक रेस्क्यू बोट खराब हो गई। इस पर सवार 37 लोगों ने पेड़ के सहारे नाव को डूबने से बचाए रखा। बाद में सभी को रेस्क्यू कर लिया गया।

मोतिहारी में गर्भवती और आशा वर्कर को एनडीआरएफ की टीम ने रेस्क्यू किया था। महिला ने बच्ची को जन्म दिया है। मां और बेटी दोनों स्वस्थ हैं। रेस्क्यू टीम ने इन्हें अस्पताल में भर्ती करवा दिया है। जवानों का कहना है कि रेस्क्यू टीम मास्क, ग्लव्स और हैंड सैनिटाइजर के साथ चल रही थी। बच्ची के प्रसव से पहले हमने नाव में सवार दो महिलाओं को मास्क और हैंड ग्लव्स पहना दिए था ताकि संक्रमण के खतरे को कम किया जा सके।

रेस्क्यू बोट पर सवार दो अन्य महिलाओं की मदद से सुरक्षित प्रसव कराया गया। कोरोना संक्रमण को देखते हुए दोनों महिलाओं को मास्क और ग्लब्स पहना दिया गया था।

मोतिहारी में डेढ़ लाख लोग प्रभावित

गंडक और बागमती नदी में उफान के चलते पूर्वी चंपारण समेत कई जिलों में बाढ़ जैसी स्थिति है। मोतिहारी में बाढ़ से करीब डेढ़ लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हैं। एनडीआरएफ के जवान लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हैं। जगह-जगह राहत कैंप बनाया गया है और लोगों को सुबह-शाम खाना दिया जा रहा है।

37 लोगों को लेकर जा रही बोट का इंजन फेल

रविवार को पूर्वी चंपारण में 37 लोगों को बचाकर ले जा रही बोट का इंजन बंद होने से वह गंडक नदी में फंस गई। एनडीआरएफ के अफसर ने बताया कि लोगों ने दो घंटे तक किसी तरह पेड़ के सहारे बोट को डूबने से बचाए रखा। इसके बाद दूसरी नाव ले जाकर इन सभी को सुरक्षित बचाया गया। एनडीआरएफ की नौवीं बटालियन के कमांडेंट विजय सिन्हा ने बताया कि बोट का इंजन फेल हो गया था।

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