Advocates have been on strike every Saturday for 35 years on the pretext of blast in Pakistan, earthquake in Nepal, this is shocking Supreme Court | पाक में धमाके, नेपाल में भूकंप जैसे बहानों से वकील 35 साल से हर शनिवार हड़ताल कर रहे, सुप्रीम काेर्ट बाेला- यह दिल दहलाने वाला

  • कोर्ट ने कहा- न्यायपालिका लंबित मामलाें और केसाें के निस्तारण की गंभीर समस्या से जूझ रही हाे, ताे वकील कैसे महीने में चार दिन हड़ताल पर जा सकते हैं
  • मामला देहरादून, हरिद्वार व उधम सिंह नगर की अदालताें का है, वर्ष 2012-16 के बीच देहरादून में वकील 455 दिन और हरिद्वार में 515 दिन हड़ताल पर रहे

Dainik Bhaskar

Feb 29, 2020, 12:35 AM IST

नई दिल्ली. उत्तराखंड के तीन जिलाें की अदालताें में पिछले 35 साल से हर शनिवार वकील हड़ताल कर रहे हैं। इसके लिए उनके बहाने भी अजीब होते हैं। पाकिस्तान के स्कूल में बम धमाका हाे या नेपाल में भूकंप आए या किसी वकील के परिवार में सदस्य की माैत हाे जाए, वे हड़ताल कर देते हैं। शुक्रवार को सुप्रीम काेर्ट ने इस पर सख्त रुख अपनाया। काेर्ट ने वकीलाें काे चेतावनी दी कि वे हड़ताल पर बने रहे ताे काेर्ट अवमानना की कार्यवाही करेगा।  

कोर्ट ने हड़ताल को अवैध बताया

जस्टिस अरुण मिश्रा और एमआर शाह की पीठ ने हड़ताल काे अवैध ठहराते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया और सभी स्टेट बार काउंसिल से वकीलाें की हड़ताल पर कार्रवाई का खाका तैयार करने के लिए छह हफ्ते में सुझाव मांगे हैं। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट उत्तराखंड हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ देहरादून बार एसाेसिएशन की अपील पर सुनवाई कर रहा था। हाई कोर्ट ने 25 सितंबर 2019 के फैसले में विधि आयोग की 266वीं रिपोर्ट का उल्लेख कर वकीलों की हड़ताल के कारण कार्य दिवसों के नुकसान के आंकड़ों का विश्लेषण किया था और हड़ताल खत्म करने का आदेश दिया था।

न्यायपालिका लंबित मामलाें और केसाें के निस्तारण की गंभीर समस्या से जूझ रही

सुप्रीम काेर्ट ने अपील खारिज करते हुए हाई काेर्ट के फैसले काे सही ठहराया। साथ ही कहा कि चीजें दिल दहलाने वाली हैं। जब न्यायपालिका लंबित मामलाें और केसाें के निस्तारण की गंभीर समस्या से जूझ रही हाे, ताे वकील कैसे महीने में चार दिन हड़ताल पर जा सकते हैं? इन दिनाें में वे काम करें ताे शीघ्र न्याय का लक्ष्य पाया जा सकता है, जाे मूल अधिकार है। ऐसी हड़तालाें से अंतत: आम आदमी परेशान हाे रहा है। बार काउंसिल से अपेक्षा है कि वह आदेशाें का पालन करे।’

3 जिला अदालतों का मामला

मामला देहरादून, हरिद्वार व उधम सिंह नगर की अदालताें का है। वर्ष 2012-16 के बीच देहरादून में वकील 455 दिन (हर साल औसतन 91 दिन) और हरिद्वार में 515 दिन (हर साल 103 दिन) हड़ताल पर रहे थे।

श्रीलंका में संविधान संशोधन हाे या भारी बारिश…  कर दी हड़ताल

हाई काेर्ट ने कहा था कि वकील काेई भी बहाना बना देते हैं। जैसे श्रीलंका के संविधान में संशाेधन, अंतर-राज्यीय नदी जल बंटवारा विवाद, िकसी वकील पर हमला या हत्या, वकील के िरश्तेदार की माैत पर शाेक संवेदना स्वरूप, किसी अन्य बार एसाेसिएशन से एकजुटता दिखाने, सामाजिक अांदाेलनाें के समर्थन में, भारी बारिश हाेने… अाैर यहां तक िक कवि सम्मेलन तक के बहाने बनाए गए। हाई काेर्ट ने यह भी िलखा था कि हड़ताल की उत्पत्ति पश्चिम उप्र से हुई है, जिसके जिलाें काे मिलाकर 9 नवंबर 2000 काे उत्तराखंड बनाया गया था। वकील क्षेत्र में हाई काेर्ट की बेंच स्थापित करने की मांग काे लेकर यह हड़ताल कर रहे थे। 


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