Balakot The Inside Story How Iaf Sought Out And Destroyed Terror Camps In Operation Bandar – बालाकोट-द इनसाइड स्टोरी: कैसे एयरफोर्स के ऑपरेशन ‘बंदर’ ने आतंकी ठिकानों को किया तबाह

बालाकोट एयरस्ट्राइक (फाइल फोटो)

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पुलवामा में पिछले साल 14 फरवरी को सीआरपीएफ काफिले पर जैश के हमले के तुरंत बाद भारत ने पाकिस्तान को सबक सिखाने की ठान ली थी। पीएम नरेंद्र मोदी ने अगले ही दिन 15 फरवरी को सुरक्षा कैबिनेट कमेटी की बैठक बुलाई। रॉ ने 18 फरवरी को आतंकी ठिकानों के सटीक इनपुट दिए और 26 फरवरी को वायुसेना के जांबाजों ने बालाकोट में घुसकर जैश के ठिकानों को तबाह कर दिया। इस मिशन की सफलता का कोडवर्ड था ‘बंदर’। वायुसेना पश्चिमी कमान के तत्कालीन प्रमुख सी हरि कुमार ने बालाकोट की बरसी पर मिशन की तैयारियों से जुड़े रोचक किस्से साझा किए हैं। उन्होंने मिराज के चयन से लेकर मिशन को सीक्रेट रखने की पूरी कहानी बयां की। हरि कुमार बालाकोट एयरस्ट्राइक के दो दिन बाद 28 फरवरी को सेवानिवृत्त हुए थे।

रॉ ने दिए ठिकानों के सटीक बिंदु

रॉ ने आतंकी ठिकानों के सटीक बिंदु दिए। रॉ ने हमें वह सब मुहैया कराया जो हमें चाहिए था। उनके पास अच्छी और साफ तस्वीरें थीं। हमारे लक्ष्य के ग्राउंड शॉट थे। हमने इनकी मदद से अपने आईएसआर सिस्टम और उपग्रह की मदद से आतंकी ठिकानों की लोकेशन को पुष्ट किया। 

इसलिए वायुसेना को मिली जिम्मेदारी

मिशन का लक्ष्य एलओसी से 50 किलोमीटर दूर था इसलिए यह जिम्मेदारी वायुसेना को दी गई। मिराज के चयन पर कुमार ने कहा, बालाकोट की भौगोलिक स्थितियों को देखते हुए मिराज सबसे बेहतर विकल्प था। यह स्पाइस और क्रिस्टल मेज को ले जाने में सक्षम था। 

मिशन सीक्रेट रहे इसलिए फोेन पर बात नहीं की

मिशन को सीक्रेट रखना सबसे बड़ी चुनौती थी। इसके लिए कई तरीके अपनाए गए। किसी को भनक न हो इसलिए रुटीन में कोई फेरबदल नहीं किया गया। पहले से तय कार्यक्रमों को जस के तस रखा गया। मिशन के किसी भी सदस्य ने फोन पर कोई बात नहीं की। जो भी चर्चा हुई आमने सामने या फिर सुरक्षित फोन लाइन पर हुई। 

26 मार्च को इसलिए चुना

सी हरि कुमार ने बताया कि 26 मार्च को इस लिए चुना क्योंकि हमें एरो इंडिया के बाद ही इसे अंजाम देना था। ताकि सभी विदेशी मेहमान लौट जाएं। इसके अलावा 26 मार्च कुमार का जन्मदिन होता है, उनको लगा कि यह शानदार दिन है।

वायुसेना प्रमुख ने दिया कोड वर्ड ‘बंदर’

वायुसेना प्रमुख ने 25 मार्च को इस मिशन का कोडवर्ड ‘बंदर’ तय किया। कुमार के विदाई समारोह के दौरान वायुसेना प्रमुख ने उनसे कहा था अगर मिशन पूरी तरह सफल रहे तो उनको फोन पर सिर्फ बंदर कह देना। यही हमारा कोड होगा। 

कोई भनक न हो इसलिए ग्वालियर से उड़े थे मिराज

दुश्मन को किसी तरह की भनक न लगे इस लिए मिराज विमानों को ग्वालियर से उड़ाया गया। वहां से बरेली के ऊपर से होते हुए मिराज श्रीनगर के रास्ते पाकिस्तान में घुसे। इस दौरान पाकिस्तान के दो एफ 16 विमानों को गुमराह करने के लिए अंबाला से चार जगुआर रवाना हुआ थे जो इन्हें भावलपुर की ओर ले गए। 

सार

बालाकोट की बरसी पर वायुसेना पश्चिमी कमान के तत्कालीन प्रमुख ने बयां की मिशन की इनसाइड स्टोरी

विस्तार

पुलवामा में पिछले साल 14 फरवरी को सीआरपीएफ काफिले पर जैश के हमले के तुरंत बाद भारत ने पाकिस्तान को सबक सिखाने की ठान ली थी। पीएम नरेंद्र मोदी ने अगले ही दिन 15 फरवरी को सुरक्षा कैबिनेट कमेटी की बैठक बुलाई। रॉ ने 18 फरवरी को आतंकी ठिकानों के सटीक इनपुट दिए और 26 फरवरी को वायुसेना के जांबाजों ने बालाकोट में घुसकर जैश के ठिकानों को तबाह कर दिया। इस मिशन की सफलता का कोडवर्ड था ‘बंदर’। वायुसेना पश्चिमी कमान के तत्कालीन प्रमुख सी हरि कुमार ने बालाकोट की बरसी पर मिशन की तैयारियों से जुड़े रोचक किस्से साझा किए हैं। उन्होंने मिराज के चयन से लेकर मिशन को सीक्रेट रखने की पूरी कहानी बयां की। हरि कुमार बालाकोट एयरस्ट्राइक के दो दिन बाद 28 फरवरी को सेवानिवृत्त हुए थे।

रॉ ने दिए ठिकानों के सटीक बिंदु

रॉ ने आतंकी ठिकानों के सटीक बिंदु दिए। रॉ ने हमें वह सब मुहैया कराया जो हमें चाहिए था। उनके पास अच्छी और साफ तस्वीरें थीं। हमारे लक्ष्य के ग्राउंड शॉट थे। हमने इनकी मदद से अपने आईएसआर सिस्टम और उपग्रह की मदद से आतंकी ठिकानों की लोकेशन को पुष्ट किया। 

इसलिए वायुसेना को मिली जिम्मेदारी

मिशन का लक्ष्य एलओसी से 50 किलोमीटर दूर था इसलिए यह जिम्मेदारी वायुसेना को दी गई। मिराज के चयन पर कुमार ने कहा, बालाकोट की भौगोलिक स्थितियों को देखते हुए मिराज सबसे बेहतर विकल्प था। यह स्पाइस और क्रिस्टल मेज को ले जाने में सक्षम था। 

मिशन सीक्रेट रहे इसलिए फोेन पर बात नहीं की

मिशन को सीक्रेट रखना सबसे बड़ी चुनौती थी। इसके लिए कई तरीके अपनाए गए। किसी को भनक न हो इसलिए रुटीन में कोई फेरबदल नहीं किया गया। पहले से तय कार्यक्रमों को जस के तस रखा गया। मिशन के किसी भी सदस्य ने फोन पर कोई बात नहीं की। जो भी चर्चा हुई आमने सामने या फिर सुरक्षित फोन लाइन पर हुई। 

26 मार्च को इसलिए चुना

सी हरि कुमार ने बताया कि 26 मार्च को इस लिए चुना क्योंकि हमें एरो इंडिया के बाद ही इसे अंजाम देना था। ताकि सभी विदेशी मेहमान लौट जाएं। इसके अलावा 26 मार्च कुमार का जन्मदिन होता है, उनको लगा कि यह शानदार दिन है।

वायुसेना प्रमुख ने दिया कोड वर्ड ‘बंदर’

वायुसेना प्रमुख ने 25 मार्च को इस मिशन का कोडवर्ड ‘बंदर’ तय किया। कुमार के विदाई समारोह के दौरान वायुसेना प्रमुख ने उनसे कहा था अगर मिशन पूरी तरह सफल रहे तो उनको फोन पर सिर्फ बंदर कह देना। यही हमारा कोड होगा। 

कोई भनक न हो इसलिए ग्वालियर से उड़े थे मिराज

दुश्मन को किसी तरह की भनक न लगे इस लिए मिराज विमानों को ग्वालियर से उड़ाया गया। वहां से बरेली के ऊपर से होते हुए मिराज श्रीनगर के रास्ते पाकिस्तान में घुसे। इस दौरान पाकिस्तान के दो एफ 16 विमानों को गुमराह करने के लिए अंबाला से चार जगुआर रवाना हुआ थे जो इन्हें भावलपुर की ओर ले गए। 




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