Bollywood News In Hindi : Muslim family became savior for Pune-based filmmaker Nachiket Guttikar amid lockdown in J&K | लॉकडाउन में फंसे फिल्म मेकर को मुस्लिम परिवार ने सहारा दिया, नचिकेत बोले- यही कश्मीरियत है, जिसके बारे में सुनते थे

दैनिक भास्कर

Apr 18, 2020, 06:26 PM IST

लॉकडाउन की मुश्किलों दौरान जम्मू-कश्मीर में फंसे पुणे के फिल्म निर्माताओं के लिए एक मुस्लिम परिवार मददगार बना। नचिकेत गुट्टीकर अपनी टीम के साथ महाराष्ट्र से कश्मीर एक डॉक्यूमेंट्री शूट करने आए थे, लेकिन लॉकडाउन की वजह से वापस नहीं जा पाए। यहां उन्हें एक मुस्लिम परिवार ने रहने को छत और खाना दिया। मुस्लिम परिवार की इस मदद से प्रभावित फिल्म मेकर्स ने कहा कि यही वह कश्मीरियत है, जिसके बारे में हम सुनते आए हैं।

नचिकेत अपने साथियों शामीन कुलकर्णी और निनाद दातार के साथ 15 मार्च को एक डॉक्यूमेंट्री की शूटिंग के लिए कश्मीर के डोडा जिले में आए थे। उन्हें 25 मार्च को जम्मू से फ्लाइट लेकर वापस जाना था। लेकिन, 24 मार्च को पूरे देश में लॉकडाउन लागू हो गया। इसके बाद नचिकेत को अपनी टीम के साथ अगले तीन हफ्ते कश्मीर में ही गुजारने पड़े।

अब हमें यहां घर की तरह महसूस होता है- फिल्म मेकर
नचिकेत बताते हैं कि डोडा के गाथा गांव में हम लोग लॉकडाउन के दौरान फंस गए। सरकार ने जब लॉकडाउन का ऐलान किया, तब हालात बेहद डरावने थे। हम तानव में थे। सड़क, रेल और हवाई जरिए बंद हो गए थे। सभी होटल भी बंद थे। तब हमें गाथा गांव के एक मुस्लिम परिवार ने अपने घर में रहने की पेशकश की। हम बेहद सौभाग्यशाली हैं। यह परिवार खुद आगे आया और हमारी मदद की। इस परिवार के साथ रहते-रहते कई हफ्ते हो गए हैं। इस परिवार के सभी सदस्यों का व्यवहार बेहद दोस्ताना है। हमें यहां घर की तरह महसूस होता है। मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि इस तरह की मेहमाननवाजी की उम्मीद आप कहीं और नहीं कर सकते। यह सच्ची कश्मीरियत है, जिसके बारे में हम अक्सर सुनते हैं।

मुस्लिम परिवार ने कहा- हमें मदद का मौका मिलना हमारा सौभाग्य

हालांकि, यही सोच नजीम मलिक और उनके परिवार की भी है। इसी परिवार ने पुणे के फिल्म मेकर और उनकी टीम को सहारा दिया है। नजीम कहते हैं कि संकट के इस समय में हमें मुसीबत में फंसे लोगों की मदद का मौका मिला है और यह सौभाग्य की बात है। नजीम ने कहा कि हमने उन पर कोई अहसान नहीं किया है। अगर कल हमारे बच्चे ऐसी परिस्थिति में फंस जाते हैं तो निश्चित तौर पर कोई ना कोई उनकी मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाएगा। जब तक हालात सामान्य नहीं हो जाते, इन मेहमानों का मेरे घर में स्वागत है।


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